धन्ना सेठ ने गेहूं की जगह खेत में बो दिया ‘रेत’ ------

धन्ना सेठ ने गेहूं की जगह खेत में बो दिया ‘रेत’ ------
संतो के जाने के बाद धन्नाजी सोचने लगे की बीज वाले गेहूं को तो बेचकर संतों को भोजन करा दिया अब खेत में क्या बोया जाये. अगर पिताजी से फिर बीज माँगने गया तो पिताजी बहुत नाराज होंगे. यह सोचकर धन्नाजी ने बोरियों में रेत भर ली और आसपास के लोगों को दिखने के लिए उस रेत को ही खेतों में बोने लगे. धन्नाजी ने राम-राम का नाम लेते हुए शाम तक बोरियों की सारी रेत खेत में छिड़क दी. आस पास के खेतों के किसान देख रहे थे की धन्ना सेठ खेतों में गेहूं बो रहे है परन्तु वे तो खेतों में रेत बो रहे थे. खेत बोने बाद धन्नाजी बड़े प्रसन्न मन से घर की ओर चल दिए, वे सोचने लगे खेत में तो कुछ उगना नहीं है, तो देखभाल भी नहीं करनी पड़ेगी. घर पर पिताजी ने पूछा खेत बो आये, धन्नाजी बोले, जी पिताजी बो आया. कुछ दिन बाद धन्नाजी के पिताजी और गाँव के कुछ बड़े बूढ़े लोग धन्नाजी के पास आये और बोले की तुमने कैसा खेत बोया है ऐसी फसल तो हमने अपने जीवन में आज तक नहीं देखी. ऐसा लगता है जैसे गेहूं का एक एक दाना नाप-नाप कर एक समान दुरी पर बोया गया है, और सारे ही दाने उग आएं हो. इतनी सुंदर फसल तो हमने आजतक नहीं देखी, ये सब तुमने कैसे किया. धन्नाजी सोचने लगे ये सब उनको ताने मार रहें है, खेत में कुछ उगा ही नहीं होगा इसलिए ऐसी बातें बोल रहें है. तब धन्ना जी ने स्वयं खेत पर जाकर देखा. वहाँ जाकर वे आश्चर्यचकित रह गए उन्होंने देखा जिस खेत में उन्होंने रेत बोई थी, वहाँ पर फसल उग आयी थी, और ऐसी सुन्दर फसल उन्होंने कभी नहीं देखी थी. फसल को देखकर धन्नाजी को भगवान की कृपा का अहसास हुआ और उनकी आँखों से आँसू निकल आये. धन्ना सेठ जोर-जोर से रोने लगे. जब धन्नाजी के पिताजी और अन्य गाँव वालों ने रोने का कारण पूछा. तब धन्नाजी ने रोते हुए सारी घटना कह सुनाई. धन्ना जी बोले पिताजी जब आपने संतो को घर लाने के लिए मना किया था और खेत बोने के लिए गेहूं दिया था, उसी दिन मुझे मार्ग में कुछ संत मिल गए. मैंने उन संतो को अपने खेत पर ठहराया और बीज वाला गेहूं बनिये को बेचकर संतों को भोजन करवाया. इसके बाद मैंने खेतों में रेत बो दी, रेत बोने के बाद यह फसल कैसे उग आयी मुझे नहीं मालूम. धन्ना जी की यह बात सुनकर उनके पिताजी के भी आंसू निकल आये और वे बोले मेरा धन्य भाग जो मेरे घर में ऐसे पुत्र ने जन्म लिया. आज के बाद हम तुमने रोकेंगे नहीं खूब साधु बुलाओ खूब संत सेवा करो हम तुम्हे अब कभी मना नहीं करेंगें. आज से मैं भी भगवान की भक्ति किया करूँगा और तुम्हारे साथ संतो की सेवा किया करूँगा. इसके बाद धन्नाजी और उनके परिवार वाले खूब संत सेवा करने लगे. कुछ समय बाद धन्नाजी की उगाई हुई फसल को काटने का समय आ गया. उस फसल से उतने ही आकर की खेती से 50 गुना ज्यादा गेहूँ निकला, यह गेहूँ इतना ज्यादा था की उसे रखने तक की जगह नहीं बची थी. गाँव से सभी लोग धन्नाजी की फसल देखकर आश्चर्य करने लगे..

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